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जिला गजेटियर (राजस्व) विभाग, उत्तर प्रदेश में आपका स्वागत है।

गजेटियर का शाब्दिक अर्थ भौगोलिक सूचकांक या भौगोलिक शब्दकोश है। इसका दायरा बहुत व्यापक है। यह एक सीमित क्षेत्र के भीतर और एक पठनीय तरीके से, एक देश/प्रदेश/जिला और उसके सामाजिक , राजनैतिक , वन , उद्योग , महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल, संस्कृति एवं सांस्कृतिक गतिविधियां आदि का पूर्ण संकलन है। गजेटियर लेखन का कार्य ब्रिटिश काल में प्रारम्भ किया गया था । यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रन्थ है।

स्वतंत्रता के बाद के जिला गजेटियरों का उसमे उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर उसके महत्व का मूल्यांकन किया गया और एक स्वतंत्र और उभरते भारत के राजनैतिक, सामाजिक और आर्थिक आयामों को विषय वस्तु की तरह गज़ेटियर में समावेशित किया गया।

प्रारंभिक गजेटियरों की परिकल्पना मुख्य रूप से औपनिवेशिक शासकों को उनके कब्जे वाले क्षेत्रों के प्रशासन में सहायता प्रदान करने के रूप में की गई थी। कंपनी द्वारा 1815 में गजेटियर्स की पहली श्रृंखला प्रकाश में आयी । यह प्रथा 1858 के बाद भी जारी रही और 1947 तक चली, जिसके दौरान भारतीय प्रशासन ब्रिटिश सरकार के अधीन था। आज़ादी के पश्चात इसके महत्व को समझते हुए भारत सरकार द्वारा इस व्यवस्था को जारी रखा गया। वर्त्तमान में प्रदेश के 50 जिलों के गजेटियर प्रकाशित हो चुके है एवं नवसृजित 25 जिलों के गजेटियर तैयार किये जा रहे है।

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पृष्ठ अपडेट : 13 January 2024 15:46
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